जन्माष्ठमी क्यो और कैसे मनाई जाती है?

जन्माष्ठमी क्यो और कैसे मनाई जाती है?

जन्माष्ठमी क्यो और कैसे मनाई जाती है?

जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है। यह भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवाँ अवतार माना जाता है।

 जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस के अत्याचार बहुत बढ़ गए थे। कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था। देवकी के आठवें पुत्र के हाथों कंस के वध की भविष्यवाणी हुई थी।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की आधी रात को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उनके जन्म के बाद वसुदेव उन्हें यमुना पार करके गोकुल ले गए और नंद बाबा तथा माता यशोदा के घर उनका पालन-पोषण हुआ।

जन्माष्टमी का मुख्य संदेश
श्रीकृष्ण का अवतार केवल कंस के वध के लिए नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए माना जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं—
“परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥”
अर्थात भगवान सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए युग-युग में अवतार लेते हैं।

जन्माष्टमी पर क्या किया जाता है?

भगवान श्रीकृष्ण का व्रत रखा जाता है।

आधी रात में कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जाता है।
बाल गोपाल का अभिषेक किया जाता है।
पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद आदि से पूजा की जाती है।
भगवान को माखन-मिश्री, फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जाता है।
कृष्ण कथा, भजन और गीता पाठ किया जाता है।
श्रीकृष्ण का जन्म क्यों हुआ?
द्वापर युग में मथुरा में कंस का अत्याचार बढ़ गया था। कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था।
आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवाँ पुत्र कंस का वध करेगा। भय के कारण कंस ने देवकी के बच्चों को मारना शुरू कर दिया।
जब देवकी के आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ, तब भगवान ने वसुदेव को निर्देश दिया कि उन्हें गोकुल ले जाकर नंद बाबा और माता यशोदा के यहाँ छोड़ दें। वसुदेव श्रीकृष्ण को यमुना पार करके गोकुल ले गए।
बाद में श्रीकृष्ण ने कंस का वध करके मथुरा को उसके अत्याचार से मुक्त किया।

जन्माष्टमी पर क्या करें इस पर्व पर सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान करना चाहिए। इसके लिए पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें और काले तिल मिलाकर नहा सकते हैं। फिर कृष्ण मंदिर जाकर भगवान को पंचामृत और शुद्ध जल चढ़ाएं। इसके बाद पीले कपड़े, फिर पीले फूल, इत्र और तुलसी पत्र चढ़ाएं। फिर मोर पंख चढाएं। आखिरी में माखन-मिश्री और मिठाइयों का नैवेद्य लगाकर प्रसाद बांटे। इस तरह की पूजा घर पर भी की जा सकती है। इस दिन घर पर बाल गोपाल को झूले में झुलाने की भी परंपरा है।

व्रत-उपवास की परंपरा ये परंपरा सेहत के नजरिये से भी खास है, क्योंकि इस पर्व पर बारिश का मौसम होता है। इस मौसम में खाना देरी से और कम पचता है। इस कारण बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है। ये ही वजह है कि व्रत-उपवास करने से मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है और सेहत में भी सुधार होता है।

पुराणों में कहा गया है इस दिन बिना अन्न खाए भगवान कृष्ण की पूजा करने से पिछले तीन जन्मों के पाप खत्म हो जाते हैं। साथ ही मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। जन्माष्टमी पर उपवास के साथ श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। अष्टमी को जया तिथि भी कहते हैं, यानी यह जीत दिलाने वाली तिथि है। इस उपवास से सभी कामों में जीत मिलती है। उपवास इसलिए ताकि भगवान की पूजा करते समय मन, शरीर और विचार शुद्ध रहें। रोग, कष्ट और दरिद्रता खत्म होती है। कृष्ण सुख और समृद्धि देते हैं।


पुराणों में जन्माष्टमी व्रत का महत्व ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक भारतवर्ष में रहने वाला जो प्राणी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करता है, वह सौ जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है। इसमें संशय नहीं है। वह दीर्घकाल तक वैकुंठ लोक में आनन्द भोगता है। फिर उत्तम योनि में जन्म लेने पर उसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति उत्पन्न हो जाती है-यह निश्चित है।

अग्नि पुराण का कहना है कि इस तिथिको उपवास करनेसे मनुष्य कई जन्मों के किये हुए पापों से मुक्त हो जाता हैं, इसलिए भाद्रपद के कृष्णपक्ष की रोहिणी नक्षत्रयुक्त अष्टमी को उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करना चाहिये | यह भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाला हैं।

जन्माष्टमी की सबसे महत्वपूर्ण पूजा मध्यरात्रि के आसपास की जाती है।
पूजा में श्रद्धा के अनुसार ये सामग्री रखी जा सकती है:
बाल गोपाल की मूर्ति
पंचामृत
दूध
दही
घी
शहद
गंगाजल या शुद्ध जल
तुलसी दल
पीले वस्त्र
चंदन
फूल
माखन-मिश्री
फल
मिठाई
दीपक और धूप
अभिषेक
पहले भगवान का जल से स्नान कराएँ। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करके पुनः शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है। फिर भगवान को वस्त्र पहनाकर चंदन, फूल और तुलसी अर्पित करें।
तुलसी दल श्रीकृष्ण की पूजा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्रीकृष्ण को कौन-सा भोग लगाया जाता है?
श्रीकृष्ण को विशेष रूप से माखन-मिश्री प्रिय मानी जाती है।
इसके अलावा श्रद्धा के अनुसार:
दूध
दही
माखन
मिश्री
पंजीरी
धनिया की पंजीरी
फल
पेड़ा
लड्डू
खीर
का भोग लगाया जा सकता है।

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