सोमवती अमावस्या Somvati Amavsaya
सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए सूर्य देव को अर्घ्य, पितरों के तर्पण और पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है इस दिन भगवान शिव और पितरों को समर्पित है।सोमवती अमावस्या के दिन किसी पवित गरीब या जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े या काले तिल का दान करें सूर्य देव को अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, गंगाजल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दे पीपल की पूजा करे।
पीपल के पेड़ के जड़ में दूध-जल अर्पित करें और दीपक जलाएं。महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा कर कच्चा सूत या कलावा लपेटती हैं。भगवान शिव की पूजा: सोमवार का दिन होने के कारण शिव जी की पूजा विशेष फलदायी होती है。शिवलिंग का कच्चे दूध, गंगाजल और शहद से अभिषेक करे.
सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्याकहा जाता है
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा और पवित्र नदियों में स्नान-दान के लिए पुण्यदायी माना जाता है।
सोमवती अमावस्या का महत्व
पीपल की पूजा और परिक्रमा
इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करती है
पीपल के चारों ओर 108 बार सूत (धागा) लपेटकर परिक्रमा की जाती है,
पितरों की मोक्ष की प्राप्ति के लिए स्नान के बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने का बड़ा महत्व है पितृ दोष से मुक्ति: यह तिथि पितरों की शांति के लिए
उत्तम मानी गई है इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और पीपल के पेड़ पर काले तिल और जल चढ़ाने से पितृ दोष शांत होता है।